शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती फिल्म परीक्षा

शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती परीक्षा

हर माँ बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे जीवन में सफलता प्राप्त करें और वे अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास भी करते हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिलता है परीक्षा फिल्म में. फिल्म में एक गरीब रिक्शाचालक पिता है जिसका बेटा पढाई में बहुत अच्छा है. वह चाहता है की बेटा पढ़ लिख कर नौकरी करे और ताकि वे गरीबी के दलदल से बाहर आ जाएँ. इसलिए रिक्शाचालक पिता अपने बेटे को अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ाना चाहता है. बेटे के एडमिशन से लेकर उसकी परीक्षा तक कई तरह की समस्याएं आती हैं, जिनको इस फिल्म बखूबी दिखाया गया है. यह फिल्म भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर कई प्रकार के सवाल उठाती नजर आती है. बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूल गरीब परिवार के होनहार, पढने में तेज बच्चे को भी एडमिशन देने में आनाकानी करते हैं और अगर किसी तरह से एडमिशन दे भी दिया जाता है तो भी कई तरह के भेदभाव किए जाते हैं . निर्देशक प्रकाश झा ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था की खामियों को पूरी ईमानदारी से फिल्म में दिखाया है. यह ईमानदारी फिल्म देखते समय आप महसूस करते हैं. एक समय के लिए आप भूल जाते हैं कि आप कोई फिल्म देख रहे हैं या कोई वास्तविक घटना आपके सामने घटित हो रही है.

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एक्टिंग – फिल्म में सभी कलाकारों ने शानदार एक्टिंग की है. आदिल हुसैन, प्रियंका बोस, शुभम झा और संजय सूरी सभी ने अपने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है. उनकी एक्टिंग का ही कमाल है कि आप फिल्म के पात्रों से जुड़ाव महसूस करते हैं.

रिलीज प्लेटफ़ॉर्म –  ZEE5 (OTT)

कहानी – परीक्षा फिल्म की कहानी एक गरीब परिवार की है. जिसमें रिक्शा चालक बुच्ची पासवान (आदिल हुसैन) अपनी पत्नी (प्रियंका बोस) और बेटे बुलबुल (शुभम झा) के साथ रहता है. बुच्ची रिक्शा चालक है और उसकी पत्नी बर्तन बनाने की फैक्ट्री में काम करती है. वह गरीब है और अपने बेटे पढ़ा लिखा कर एक बड़ा आदमी बनाना चाहता है, क्योंकि वह जानता है कि गरीबी से निकलने का यही एकमात्र रास्ता है. बुच्ची पासवान अंग्रेजी मीडियम स्कूल के बच्चों को अपने रिक्शा में बिठाकर स्कूल छोड़ता है और उसका खुद का बेटा बुलबुल सरकारी स्कूल में पढाई करता है. बुच्ची को लगता कि उसका बेटा सरकारी स्कूल में पढाई कर के सफलता प्राप्त नहीं कर पायेगा और वह अपने बेटे को अंग्रेजी मीडियम स्कूल सैफायर में एडमिशन दिलाने का मन बना लेता है. अनेक अडचनों के बाद भी वह अपने बेटे का स्कूल में एडमिशन करवा देता है. लेकिन एडमिशन के बाद भी दिक्कतें कम नहीं होती और हर महीने की फीस जमा कराना उसके लिए नामुमकिन हो जाता है और रिक्शाचालक बुच्ची पासवान मजबूर होकर चोरी करने लग जाता है. चोरी करते समय वह पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है. तब आई.पी.एस. अधिकारी कैलाश आनंद (संजय सूरी) को बुच्ची पासवान से पूछताछ करने पर सारी बातें पता लगती हैं. तो वह रिक्शाचालक के बेटे बुलबुल सहित कई बच्चों को पढाने के लिए उनकी बस्ती जाता है. यह देखकर समाज के तथाकथित बड़े लोग आई.पी.एस. अधिकारी पर अपने बच्चों को पढ़ने का दवाब बनाते हैं, लेकिन वह मना कर देते हैं. इसके बाद रिक्शाचालक को कानून के द्वारा उसे सजा मिलती है. और उसके बेटे बुलबुल को परीक्षा में नहीं बैठाने के लिए समाज के बड़े लोग स्कूल पर दवाब बनाते हैं. क्या बुलबुल परीक्षा दे पाता है? आई.पी.एस. कैलाश आनंद के साथ क्या होता है? रिक्शाचालक को क्या सजा मिलती है? इनका जवाब आपको फिल्म के अंत में मिल जाता है.

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